https://ruralindiaonline.org/en/articles/%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B7-%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AA-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/ पड़ोस की कुछ महिलाएं अब तक हमारे पास आ चुकी थीं. उनमें से एक 32 वर्षीय संध्या भी थीं, जो पिछले पांच सालों से मानवाधिकार जन निगरानी समिति की सदस्य हैं. संध्या बातचीत की शुरुआत अनीमिया की व्यापक समस्या से करती हैं. हालांकि, 2015-16 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 ( एनएफएचएस-4 ) में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की 52 प्रतिशत महिलाएं अनीमिया की शिकार हो सकती हैं. संध्या कहती हैं कि अनेई की शत-प्रतिशत महिलाएं मध्यम या तीव्र अनीमिया का शिकार हैं. संध्या आगे कहती हैं, ''हमने हाल ही में इस गांव की सभी महिलाओं का पोषण-मानचित्रण [पोषण का मूल्यांकन] किया और पाया कि उनमें से किसी का भी ...
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